दो पैसे की धुप चार आने की बारिश
है बस यह ज़िंदगी
बस इतनी सी है मेरी ख्वाइश
पल में टूटती पल में बिखरती
पल में सदियों का साथ यह देती
यह दो लम्हों की ज़िंदगी
यह मेरी ज़िंदगी
समय का यूँ रोज़ बदलना
उमीदों से रोज़ मिलना
पुराने अख़बारों से लिपटी
हर रोज़ नयी उमीदों की यह ज़िंदगी
कभी तूफ़ान कभी बारिश
कभी आसमान चूमने की ख्वाइश
सितारों पे कदम रखूं
आपनी तोह बस येही ख्वाइश
ज़रूरत एक और ज़िंदगी की
ना इसमें पूरी होगी यह ख्वाइश
ना जाने हम फिर आयें ना आयें
चलो आभी कदम उठाएं
तमन्ना पूरी करनी है
साथ हम सब कदम उठाएं
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