Sunday, May 29, 2011

New Poem 2

है एक और ज़िंदगी की ज़रुरत
लगता है कुछ सपने अधूरे रह जायेंगे
हसरतें रह जाएँगी अधूरी
सपने न हो पाएंगे पुरे
इस रफ़्तार भरी ज़िंदगी में
तंग होती जा रही है फुर्सत
कम होने लगे हैं अब आशाएं
ख़तम होती जरी है सब हसरत

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