Thursday, December 2, 2010

Collection of My Poems

Struggle
"What is truth,simply struggle
nor me nor you its simply struggle
there is no life without struggle.

From craddle to the grave life is simply struggle
one who cramps inforont of struggle dies like falling bud
one who doesnt stop seeing a failure
one who fights all odds and faces the strongest wind
is the one who wins the battel of life
so the only truth that stands apart is struggle only constant struggle"






Life
"What is life no one knows
maybe a complex web of desires
or maybe a canvas painted with different shades of colours
darkness beign the theme and white grey shades
its actually a sea of hope where some gets drown and most of them floats"


Desire
"Sea of feeling inside me
bursting like tears
but you are not beside me
withwhom i can only share

monsoon has arrived early and everyone is wet in rain
but i m standing all alone
thinking of you in this summer rain
if by chance its passes by you
please dont get wet as i m still waiting for you
as i m all deprived"


यादें
"यादें क्यों आती हैं
ऊन गुज़रे हुए ज़माने की बातें क्यों याद आती हैं
आचा था मैं तनहा था
यादों ने साथ जो छोरा था
लो फिर से याद आ गए वोह दिन
वोह पल छीन वोह बीती यादें"

रात बाकी है
"रात बाकी है , बात बाकी है
ना जाने कितनी बातें हैं जो सुनानी बाकी है
गुज़रे हुए उन बीते लम्होंन की दास्ताँ बाकी है
एय खुदा थोड़ी से मोहलत तोह दे
वोह पूरी अनकहीं दास्ताँ सुनानी बाकी है "

डर लगता है

"मुझे अँधेरे से नहीं उजालों से डर लगता है
ना जाने कब ज़िंदगी से प्यार हो जाये ईस एहसास से डर लगता है
ज़ख्मों से है प्यार मुझे मलहम से डर लगता है
दर्द तोह मिट जाता है एक दिन
मगर ज़िंदगी से न प्यार हो जाये इस एहसास से डर लगता है "

सपने
चला जाता हूँ आपने ही धून में
आँखों में सपनों का बादल लिए
सपने तोह आपने हैं बाकी पराये
न है कोई अपना सभी बेगाने हैं
फिर भी मैं खुस हूँ , आपने ही धुन में हूँ
दूर दूर तक न कोई ग़म के साए हैं


कसूर
"क्या कसूर हैं ईन मासूमों का जो ज़ुल्मं ईन पे होता है
क्या येही हमारा आने वाला काल है जो खौफ की आँधियों में जीता है
बम बारूदों से गूँज रहा है सारा जहाँ
क्या दे कर जायेंगे हम इनको
गोली , बारूद या हाहाकार "

युद्ध
"यह जीवन है अग्निपथ
रुक जाना मेरा काम नहीं
जलते शोलों को पार कर पाऊं
है बस मेरा काम येही

जीत है हर पल यहाँ
ठोकर मिले लाख सही
जीवन युद्ध के ईस भंवर में
चलते रहना काम येही
पथ में बिछे लाख कांटे हों
तकलीफें हों लाख सही
जीवन में थोडा दम भर लूं
है बस मेरा काम येही
उमीदों से दमन भर लूं
ग़म दरकिनार मैं कर दूं
जीवन युद्ध में जीत ही सोचूं
मिले न मिले उम्मीद ही सही
पल में खुशियाँ पल में तकरार
पल बहर में निराशा ही सही
इन सभी मुश्किलों को पार करलूं
है बस मेरा काम येही
जीवन है बस खेल पलों का
पल भर तोह मैं भी जी लूं
उस पार मंजिल है हमारी
कुछ पग तोह मैं भी चल लूं "

दौड़
"इस भाग दौड़ की ज़िंदगी में
फुर्सत किसे है जीने को
सब चल पड़े हैं जीवन पथ पर फुर्सत किसे है मरने को

उम्र से लम्बी सड़कों में कितने की दम टूट चुके
न जाने कितने बाकि है न जाने कितने छूट चुके

ईस पथ में हैं कांटे बिछे
रुखा ईस का यह तन है

रुक जान मेरा काम नहीं
नाम ईसका जीवा हैं "

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